कक्षा 6 की NCERT भूगोल पुस्तक का अध्याय 3, "पृथ्वी की गतियां," पृथ्वी की दो मुख्य गतियों: घूर्णन (rotation) और परिक्रमण (revolution) पर केंद्रित है। ये गतियां दिन और रात, मौसमों के परिवर्तन और तापमान तथा जलवायु में बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम इस अध्याय के सभी मुख्य बिंदुओं के बारे में जानेगे, जो कक्षा 6 व प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रो के लिए उपयोगी है।
परिचय: पृथ्वी की दो मुख्य गतियां
पृथ्वी की दो मुख्य गतियां हैं:
घूर्णन (Rotation): पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमने को घूर्णन गति कहते हैं।परिक्रमण (Revolution): पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने को परिक्रमण कहते हैं।
ये गतियां प्रमुख घटनाओं जैसे दिन और रात, तथा मौसम के परिवर्तन के लिए जिम्मेदार होती हैं।
घूर्णन गति
- यह गति दिन और रात होने का कारण होती है।
- घूर्णन पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की क्रिया है,पृथ्वी की धुरी एक उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के बीच से जाने वाली एक काल्पनिक रेखा होती है। पृथ्वी एक घूर्णन लगभग 24 घंटे में पूरा करती है।
- धुरी का झुकाव: पृथ्वी की धुरी 23.5° के कोण पर झुकी होती है।
- दिन और रात: घूर्णन के कारण पृथ्वी का एक हिस्सा सूर्य की ओर रहता है जिसे दिन कहते है।और दूसरा हिस्सा अंधकार में होता है जिसे रात कहते है।
- घूर्णन की दिशा: पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, जिसके कारण सूर्य पूर्व सेउदय होता और पश्चिम में अस्त होता दिखाई देता है।
घूर्णन के प्रभाव
- समय क्षेत्र (Time Zones): पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समय पर दिन व रात होती है, जिससे विभिन्न समय क्षेत्रों का निर्माण होता है।
- कोरियोलिस प्रभाव (Coriolis Effect): घूर्णन के कारण वायुमंडलीय और महासागरीय धाराओं में कोरियोलिस प्रभाव उत्पन होता है, जो उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में वायु और जल की धाराओं को अलग-अलग दिशा में मोड़ता है।
परिक्रमण गति:
यह गति मौसमों में परिर्वतन का कारण होती है।
परिक्रमण गति पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर घूमने की गति है। पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक पूरा परिक्रमण करने में 365.25 दिन लगते हैं, जिसे एक वर्ष कहा जाता है।- अंडाकार कक्षा (Elliptical Orbit): पृथ्वी सूर्य के चारों ओर अंडाकार (अंडा के आकार की) कक्षा में घूमती है।
- मौसम (Seasons): पृथ्वी की धुरी का झुकाव और उसकी परिक्रमण गति मौसमों के परिवर्तन का कारण बनती हैं। जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है, तो पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में साल के अलग-अलग समय पर सूर्य के प्रकाश की मात्रा / उष्मा बदलती रहती है। जिस कारण मौसम में बदलाव होता है।
- ग्रीष्म (Summer): जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका होता है।
- शीत (Winter): जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर होता है।
- पतझड़ (Autumn) और वसंत (Spring): बदलाव के मौसम, जब कोई भी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका या सूर्य से दूर नहीं होता है। तब पतझड़ (Autumn) और वसंत (Spring) का मौसम होता है।
अयनांत और विषुव (Solstices and Equinoxes)
अयनांत जिसे संक्रांति भी कहते है एक भगौलिक घटना है जो वर्ष में दो बार घटित होती है जब सूर्य विषुवत रेखा के सापेक्ष अपनी उच्चतम अथवा निम्नतम अवस्था में भ्रमण करता है। विषुव और अयनान्त मिलकर एक ऋतु का निर्माण करते हैं। विभिन्न सभ्यताओं में अयनान्त को ग्रीष्मकाल और शीतकाल की शुरुआत अथवा मध्य बिन्दु माना जाता है।
- ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) (21 जून): उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन , जब उत्तरी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होता है। वहीं, दक्षिणी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन होता है।
- शीत अयनांत (Winter Solstice) (22 दिसंबर): उत्तरी गोलार्ध में सबसे छोटा दिन, जब उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर होता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है।
विषुव (Equinoxes): विषुव ऐसा समय होता है, जब सूर्य भुमध्य रेखा के ठिक ऊपर होता हैजिसमें दिन और रात लगभग बराबर होते हैं।
- 21 मार्च और 23 सितंबर को, दोनों गोलार्धों(उत्तरी व दक्षिणी) में समान मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है अर्थात इस दिन सूर्य भुमध्य रेखा के ठिक ऊपर होताहै। जिससे दिन और रात की लंबाई समान होती है। इसे क्रमशः वसंत विषुव और पतझड़ विषुव कहा जाता है।
महत्वपूर्ण बिन्दु
- धुरी (Axis): वह काल्पनिक रेखा जिसके चारों ओर पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है।
- कक्षा (Orbit): वह मार्ग जिस पर पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
- लीप वर्ष (Leap Year): हर चार साल में एक अतिरिक्त दिन (29 फरवरी) जोड़ा जाता है, ताकि पृथ्वी के परिक्रमण में लगे अतिरिक्त 0.25 दिनों की उचित गणना हो सके।
- भूमध्य रेखा (Equator): वह काल्पनिक रेखा जो पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है।
अतिरिक्त जानकारी: पृथ्वी की गतियों का दैनिक जीवन पर प्रभाव
- डेलाइट सेविंग टाइम (DST): कुछ देश गर्मियों में दिन के समय का बेहतर उपयोग करने के लिए अपनी घड़ियों को एक घंटे आगे बढ़ाते हैं जिसे डेलाइट सेविंग टाइम कहते है।
- वैश्विक जलवायु पैटर्न: पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर परिक्रमण वैश्विक जलवायु पैटर्न को प्रभावित करते हैं, जिनमें मानसून, व्यापारिक हवाएँ, और रेगिस्तानों और उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का निर्माण शामिल है।
- ध्रुवीय दिन और रात: ध्रुवों पर, गर्मी के दौरान सूर्य 24 घंटे तक दिखाई देता है जिसे ध्रुवीय दिन कहते है, जबकि सर्दियों में सूर्य 24 घंटे तक नहीं उगता जिसे ध्रुवीय रात कहते है।
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