अशोक – वह सम्राट जिसने युद्ध छोड़ दिया
परिचय
अशोक मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। जिन्हें उनकी धम्म नीति कलिंग युद्ध के बाद उनके हृदय परिवर्तन और बौद्ध धर्म के व्यापक प्रसार के लिए जाना जाता है। इस अध्याय में अशोक की शासन शैली, उनकी धम्म नीति और कलिंग युद्ध के विनाशकारी प्रभावों के बाद उनका अहिंसा की ओर झुकाव और युद्ध से पूर्णतः विमुख होने की कहानी विस्तार से बताई गई है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने राज्य और समाज के लिए जो योगदान दिए। उनकी भी चर्चा की गई है जिसका उद्देश्य न केवल युद्ध से होने वाले दुख-दर्द से मुक्ति पाना था बल्कि समाज में नैतिकता और शांति की स्थापना करना था।
मौर्य साम्राज्य और अशोक की पृष्ठभूमि:
- मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी। उनके बाद उनके पुत्र बिंदुसार ने शासन किया।
- अशोक, बिंदुसार के पुत्र थे, जिन्होंने लगभग 269 ईसा पूर्व मौर्य साम्राज्य की गद्दी संभाली।
- मौर्य साम्राज्य भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य था और इसमें वर्तमान भारत के अधिकांश हिस्सों के साथ-साथ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ हिस्से भी शामिल थे।
कलिंग युद्ध:
- अशोक के शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण घटना कलिंग युद्ध थी जो उनके शासन के आठवें वर्ष (लगभग 261 ईसा पूर्व) में हुआ।
- कलिंग, जो वर्तमान ओडिशा का क्षेत्र था ने अशोक के साम्राज्य में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
- इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए थे और यह युद्ध अत्यंत भीषण और विनाशकारी था। अशोक ने इस युद्ध को जीता लेकिन इस युद्ध की विभीषिका ने उनके दिल और दिमाग को झकझोर दिया।
अशोक का हृदय परिवर्तन:
- कलिंग युद्ध के बाद अशोक को युद्ध के परिणामस्वरूप हुई व्यापक हानि और दुख का एहसास हुआ।
- युद्ध के विनाश ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने युद्ध को त्यागने और अहिंसा का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
- अशोक ने बौद्ध धर्म की शरण ली और अपनी धम्म नीति का पालन किया जिसमें युद्ध, हिंसा, और अत्याचार का विरोध और शांति, करुणा और सहिष्णुता को बढ़ावा दिया गया।
अशोक का धम्म:
- अशोक के धम्म का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच नैतिक और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था। यह नीति बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर आधारित थी।
- इसमें अहिंसा (हिंसा का त्याग), सत्य (सच्चाई का पालन), करुणा (दूसरों के प्रति सहानुभूति) और सहिष्णुता (विभिन्न मतों और धर्मों के प्रति सहनशीलता) शामिल थे।
- अशोक ने अपने धम्म को पूरे साम्राज्य में प्रचारित किया और सभी धर्मों के प्रति सम्मान और सहिष्णुता की शिक्षा दी।
अशोक के अभिलेख और स्तंभ:
- अशोक ने अपने विचारों और नीति को जनता तक पहुंचाने के लिए पत्थरों और स्तंभों पर अभिलेख खुदवाए।
- इन अभिलेखों को प्राकृत भाषा में लिखा गया और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण किया गया। इनमें नैतिकता, धर्म और प्रशासनिक आदेश शामिल थे।
- अशोक के ये अभिलेख भारत के विभिन्न हिस्सों में पाए गए हैं और वे आज भी भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।
अशोक द्वारा किए गए सुधार:
- अशोक ने जनकल्याण के लिए कई सुधार किए। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षारोपण करवाया, यात्रियों के लिए सड़कों पर कुएं और धर्मशालाओं का निर्माण किया और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की।
- उन्होंने पशुओं के प्रति क्रूरता पर रोक लगाने के लिए भी कदम उठाए और लोगों को अहिंसा का पालन करने की सलाह दी।
बौद्ध धर्म का प्रचार:
- अशोक ने न केवल अपने साम्राज्य में बल्कि विदेशी देशों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया।
- उन्होंने श्रीलंका, म्यांमार (बर्मा), मिस्र, ग्रीस, और अन्य देशों में बौद्ध धर्म के प्रचारकों को भेजा।
- उनकी बेटी संघमित्रा और पुत्र महेंद्र ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म का प्रचार किया, जिससे वहां बौद्ध धर्म का प्रसार हुआ।
अशोक के अभिलेखों का महत्व:
- अशोक के अभिलेख भारत के इतिहास के सबसे पुराने दस्तावेजों में से एक हैं। ये अभिलेख उस समय की प्रशासनिक, सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की जानकारी देते हैं।
- अभिलेखों में न केवल अशोक की नीतियों का उल्लेख है बल्कि बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों की भी व्याख्या की गई है।
- इनमें प्रमुख रूप से धम्म नीति का प्रचार, अहिंसा, और धार्मिक सहिष्णुता का संदेश मिलता है।
अशोक का धम्म और आधुनिक समाज:
- अशोक की धम्म नीति ने भारतीय समाज और राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। उनका मानना था कि शासन का उद्देश्य केवल साम्राज्य का विस्तार नहीं होना चाहिए बल्कि समाज में नैतिकता और शांति की स्थापना भी होनी चाहिए।
- आज भी भारत के राष्ट्रीय प्रतीक और ध्वज में अशोक के स्तंभ और अशोक चक्र को स्थान दिया गया है जो उनके योगदान का प्रतीक है।
MCQs
1. कलिंग युद्ध कब हुआ था?
a) 273 ईसा पूर्व
b) 269 ईसा पूर्व
c) 261 ईसा पूर्व
d) 251 ईसा पूर्व
उत्तर: c) 261 ईसा पूर्व
2. अशोक ने किस धर्म को अपनाया था?
a) हिन्दू धर्म
b) बौद्ध धर्म
c) जैन धर्म
d) इस्लाम
उत्तर: b) बौद्ध धर्म
3. अशोक की धम्म नीति किस पर आधारित थी?
a) शक्ति और विस्तार
b) अहिंसा, सत्य और सहिष्णुता
c) धार्मिक युद्ध
d) व्यापार और वाणिज्य
उत्तर: b) अहिंसा, सत्य और सहिष्णुता
4. अशोक के अभिलेखों की भाषा क्या थी?
a) संस्कृत
b) प्राकृत
c) पालि
d) फारसी
उत्तर: b) प्राकृत
5. अशोक के किन परिवार के सदस्यो ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म का प्रचार किया?
a) उनकी पत्नी
b) उनके पुत्र और पुत्री
c) उनके भाई
d) उनके गुरु
उत्तर: b) उनके पुत्र और पुत्री
निष्कर्ष
अशोक का जीवन और शासनकाल प्राचीन भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कलिंग युद्ध से हृदय परिवर्तन और अहिंसा और बौद्ध धर्म की नीति को अपनाना इतिहास में एक अद्वितीय घटना है। अशोक ने न केवल अपने साम्राज्य में बल्कि पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म का प्रचार किया। उन्होंने युद्ध और हिंसा के खिलाफ अपनी धम्म नीति को अपनाकर समाज में शांति और नैतिकता की स्थापना की। उनके शासनकाल में किए गए सुधार और अभिलेख आज भी प्राचीन भारत की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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